"आज क्या उखाड़ा?"

सी पी रविकुमार 

टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स 


"आज क्या उखाड़ा?" 

प्रोफेसर धनंजय गद्रे के कमरे में मैंने यह वाक्य पहली बार पढ़ा। उनके कमरे के दरवाज़े पर बड़े बड़े अक्षरो में लिखा गया यह वाक्य किसी को भी सोच में डाल देता है। 

प्रोफेसर गद्रे एन एस आई टी (NSIT, नेताजी सुभाष इंस्टिट्यूट आफ टेक्नॉलोजी) में इलेक्ट्रानिक्स पढ़ाते हैं। उनके कमरे में बिखरे पड़े तार, पी सी बी, बैटरी, पुस्तकें और कई इलेक्ट्रानिक्स संबंधी सामाग्री  इस विषय में उनकी रुची  को  जाहिर कर देती हैं। 

"सर, इस का क्या अर्थ है?" मैं ने उनसे पूछा। मेरा इशारा दरवाज़ें पर लिखे गये वाक्य की ओर था। 

प्रोफेसर गद्रे मुस्कुराये।  "ये मेरे विद्यार्थिंयों के लिए है! उखाड़ा - इस शब्द का अर्थ है खोद के निकालना।   मैं उनसे अक्सर पूछता हूँ कि आज क्या खोद कर निकाला? कुख नया सीखा?" 

"सर, अंग्रेजी में उखाड़ा शब्द का भाषांतर होगा  unearth ..." मैंने भी मुस्कुराते हुये कहा। "इस वाक्य को ऐसे भी लिख सकते हैं - आज क्या अनर्थ किया?!"

हम दोनों हंसे। 

वैसे जिस लैब में बहुत कुछ संशोधन हो रहा हो, वहा कुछ न कुछ unearth हो तो जाता ही है! जब भी मैं दिल्ली जाकर प्रोफेसर  गद्रे से मिलता हूँ, कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है। उनके विद्यार्थीं न जाने कितने नये प्रॉडक्ट्स बनाने में लगे हैं।  पिंग पांग का खिलोना, तम्बोला खेलने के लिए नया साधन, एलेक्ट्रानिकी बर्थ डे कैंडल, एक नये  किस्म की  अलारम घडी, … 

अब अलारम घडी को ही लीजिये। यह नयी अलारम घडी कुछ इस प्रकार काम करती है। मान ली जिये आप रात एक बजे तक काम करते रहे और विश्राम करने से पहले इस अलारम घडी को सुबह के पांच बजे के लिये जोड़ कर सो गये। आप मीठी नींद सो रहे थे कि अलारम ने आपको जगाया। अब  स्नूज़ बटन बना ही इस लिये है कि कुछ देर के लिये और आप सपनों की दुनिया में वापस जा सकें। लेकिन यह क्या! यह अलारम घडी तो चुप होने का नाम ही नहीं लेती! उलटा वह आप से कुछ प्रश्न पूछ रही है! और ऐसा वैसा प्रश्न नहीं, कुछ गणित के  सवाल! जैसे तीन दशमलव पांच को शून्य दशमलव सात से डिवाइड किया जाये तो क्या लब्ध होगा!  

गणित और सुबह सुबह! अगर गलत उत्तर दें तो अलारम दूसरा प्रश्न लेकर हाजिर! और जब तक आप तीन प्रश्नों के उत्तर सही सही न दे पाते हों, अलारम बजती रहेगी। उत्तर दें या न दें, आप की नींद तो खुल गयी न?

ऐसे कई आविष्कार आपको यहाँ मिलेंगे। टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के MSP 430, TIVA, और Sitara प्रोसेसरस् को ले कर इन आविष्कारों का गठन किया गया है। और मज़े की बात तो यह है कि यह सब आविष्कार प्रोफेसर  गद्रे के निर्देशन में विद्यार्थियों ने  उखाड़ा है! जून व जुलाई २०१३ में प्रोफेसर गदरे के निर्देशन में NSIT में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स सेंटर आफ एम्बेडेड प्रॉडक्ट डिज़ाइन (Texas Instruments Center for Embedded Product Design) में जो महीने भर का कार्यागार चला, उसमें विद्यार्थियों नें इन प्राडक्टस का निर्माण किया है। इन आविष्कारों के बारे में बना एक चित्र आप यहाँ देख सकते हैं - http://youtu.be/2_K-vesNbic । 

प्रोफेसर  गद्रे पुनः डिसेम्बर में इस कार्यागार का आयोजन करने के किये तैयारियां कर रहे हैं। जो विद्यार्थी भाग लेना चाहते हैं वे एन एस आई टी के सहायक प्राध्यापक तरुण रावत से संपर्क करें - उनका ईमेल है tarundsp@gmail.com 

कार्यागार में भाग लेने वालों से (अलारम घडी के व्यतिरिक्त) मैं सिर्फ एक ही सवाल पूछूंगा -आज क्या उखाड़ा?